प्राकृतिक प्रकोप क्या है :- प्रकृति की घटना है जब चरम रूप ग्रहण कर लेती है तो उसे से मानव सहित संपूर्ण जगह-जगह कठिनाइयां में पड़ जाता है और कभी-कभी विनाश की स्थिति उत्पन्न हो जाती है ऐसी घटनाएं कभी-कभी इतनी त्वरित हो जाती है 


कि संभाल लेता ना ठीक नहीं होता इनका प्रभाव छतरी होते है जो सूचना राष्ट्र आक्रांत हो जाता है प्रकृति की इन घटनाओं के सामने कभी कभी मनुष्य वाना बन जाता है जिसे ज्वालामुखी और भूकंप ऐसी घटनाएं प्रकृति की सामान्य परिवर्तन प्रक्रिया से जन्म लेती है 

लेकिन कभी-कभी इनकी गवर्नर विस्तार के मनुष्य की कुछ नौकरी है सहायक बन जाती है जिससे मौसमी घटनाओं की उग्रता

ऐसी विघटनकारी प्राकृतिक घटनाओं को प्राकृतिक आपदा पर्यावरण प्रकोप पर्यावरणीय आघात चरम घटना या शब्दावली से व्यक्त किया जाता है लेकिन मूल भावना सभी स्थितियों में समान है 

जब भी प्रकृति या मानव जनित भौतिक घटना जैन समाज के लिए हानिकारक विनाशक हो तो प्रकृति प्रकोप कहा जाता है इसकी गहनता में अंतर को ध्यान में रखते हुए भिन्न-भिन्न शब्दावली का प्रयोग किया जाता है स्पष्ट है 

कि बहुत ही किया पर्यावरणीय तत्वों से उत्पन्न विनाशकारी घटनाओं को प्राकृतिक प्रकोप कहते हैं जिसे भूकंप ज्वालामुखी बाढ़ सूखा मृदा अपरदन आदि.


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