लुप्तप्राय प्रजातियां : - लगातार बढ़ती हुई मानव जनसंख्या इसकी भोजन एवं पदार्थों की बढ़ती मांग से प्राकृतिक संसाधनों का बहुत अधिक दोहन हो किया गया शहरी क्षेत्रों की विधि मकान एवं सड़कों का निर्माण कृषि भूमि की बढ़ोतरी के लिए वनों की कटाई बांध निर्माण 


आदि के कारण प्राकृतिक संसाधनों की लगातार कम होती जा रही है नगरीकरण औद्योगिकरण और वर्ग को रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग के कारण पर्यावरण प्रदूषित होने लगे हैं तथा मिट्टी जल एवं वायु प्रदूषित हो गई है 

जिसके कारण वन्य जीव का अस्तित्व खतरे में पड़ गए हैं इसके अतिरिक्त मनुष्य अपने लाभ एवं आर्थिक वृद्धि के लिए जानवरों को अधिकार एवं उनकी है जीवन खतरे में पड़ गया है

भारत की संकटा पन्ने पादप जातियों की सूची बनाने का प्रथम संगठन प्रयास 1970 के लगभग बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा वन अनुसंधान देहरादून द्वारा किया गया जिन्होंने लगभग 100 जातियों की सूची बनाई.

प्राकृतिक प्रकोप क्या है

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