पर्यावरण का अर्थ :- पर्यावरण शब्द का निर्माण दो शब्दों से मिलकर हुआ है पर ईंधन आवरण फ्री का अर्थ है चारों तरफ और आवरण का अर्थ है ढके हुए इस प्रकार पर्यावरण का वातावरण शब्द का अर्थ हुआ व्यक्ति के आसपास और चारों और जो कुछ भी है वही उसका वातावरण या पर्यावरण है


मानव के चारों तरफ फैली हुई वातावरण को पर्यावरण की परिधि में माना जाता है मानव जन्म लेने से मृत्यु तक पर्यावरण में रहता है इसी में वह व्यक्तित्व एवं सामाजिक क्षेत्र में विकास करता है 

यदि उसे अच्छा वातावरण नहीं दिया गया तो वह स्वास्थ्य मानव के रूप में स्वस्थ नागरिक नहीं बन सकता व्यक्ति को चारों ओर से ढकने वाला आवरण ही पर्यावरण है इसके अभाव में जीवन ही असंभव है कुछ विद्वानों ने इसकी परिभाषा निम्नलिखित रुप से अधिक स्पष्ट कर दी है

पर्यावरण उन सभी बाहरी शक्तियों एवं प्रभावों का वर्णन है जो प्राणी जगत के जीवन स्वभाव व्यवहार विकास और परिपक्व को प्रभावित करती है

पर्यावरण शब्द का अभिप्राय उन सभी बाहरी शक्तियों और तत्वों से जो व्यक्ति को आजीवन प्रभावित करते हैं

पर्यावरण व प्रत्येक वस्तु है जो जींस के अतिरिक्त प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करता है

पर्यावरण का वातावरण वह शक्ति है जो हमें प्रभावित करती है

पर्यावरण के प्रकार

पर्यावरण मुख्य दो रूप से विद्यमान है प्राकृतिक पर्यावरण और सामाजिक पर्यावरण

प्राकृतिक पर्यावरण :-  प्राकृतिक वातावरण से संबंध भौतिक एवं जैविक पर्यावरण से वायु जल पर्वत समुद्र नदी खनिज पदार्थ पशु पक्षी जीव जंतु आदि सभी प्राकृतिक पर्यावरण के अंग है 

यह सभी अंग जे विकी एवं अजय विकी पर्यावरण को संतुलन बनाने में सहायक होते हैं मानव जीवन में प्राकृतिक पर्यावरण का महत्वपूर्ण स्थान है

सामाजिक पर्यावरण :- सामाजिक पर्यावरण मानव के सामाजिक संबंधों से प्रकट होता है इसके अंतर्गत हम सामाजिक आर्थिक सांस्कृतिक राजनीतिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्रों में मानव व्यक्तित्व के विकास का अध्ययन करते हैं

मानव एक सामाजिक प्राणी है उसे परिवार में माता-पिता भाई-बहन आदि से संबंध बनाए रखना पड़ता है तो समाज में अन्य वर्ग पास पड़ोसी समुदाय प्रदेश एवं राष्ट्रीय से संबंध बनाए रखना पड़ता है यह सभी सामाजिक पर्यावरण की सीमा में आते हैं

पर्यावरण की आवश्यकता

मानव एक सामाजिक प्राणी है पता उसका परिवार एवं समाज से घनिष्ठ संबंध होता है पर्यावरण का अर्थ है वातावरण जिसमें संपूर्ण प्रकृति नदिया जलाशयों वन उपवन वाटिका झरने पर्वत श्रृंखलाएं चट्टान खनिज पेड़ पौधे वायु एवं जल का सहयोग सभी चीजें आती है 

मनुष्य वातावरण में ही जी रहा है अतः शुद्ध वातावरण महत्वपूर्ण आवश्यकता है कक्षा में छात्रों को विस्तृत पर्यावरण के बारे में ज्ञान नहीं कराया जाता है अवलोकन प्रयोजन एवं पर्यटन विज्ञान शरीर की विधि है जो उसे अपने चारों ओर की प्रकृति के रहस्य के बारे में अवगत कराती है

प्रकृति का क्षेत्र विस्तृत है जो कि पर्यावरण के साथ जुड़ा हुआ है वह प्राकृतिक घटनाओं की जानकारी तथा उसके कारण को ढूंढता है प्राकृतिक वन संपदा का अवलोकन एवं प्राथमिक स्तर पर एक मनोहरी रूप प्रस्तुत करती है

प्राकृतिक प्रकोप क्या है

लुप्तप्राय प्रजातियां

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