मन के हारे हार है मन के जीते जीत :- व्यक्ति वास्तव में मन के कारण हारता है और मन के कारण ही जीत है सुख-दुख आशा निराशा हानि लाभ जीवन में लगे ही रहते हैं व्यक्ति को चाहिए कि निराशा या कष्ट के क्षणों में भी कभी भी अपने मन को पराजित ना होने दें 


अवसाद के चरणों मैं उसे धैर्य से काम लेना चाहिए और हालत में विजय के लिए प्रयास करते रहना चाहिए वास्तव में हारता वही है जो मन से हार मान लेता है और जीतता वही है 

जिसका मन कभी हार नहीं मानता एक बार असफलता मिलने पर दुगने उत्साह से भर कर अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होने वाले व्यक्ति  अपना लक्ष्य हासिल कर लेते

तू इस प्रकार कहा जा सकता है कि अगर हम ठान लेते हैं तो हमारी जीत होगी अगर हम मान लेते हैं तो हमारी हार होगी मन में हमारी जो भी बात रहेगी वह हमारे जीवन में रहेगा

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