जैसी संगति बैठिए ते सोई फल होत :- मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है जब तक वह समाज से संपर्क स्थापित नहीं करता तब तक उसके जीवन की गाड़ी नहीं चल सकती 


अकेला व्यक्ति या तो देवता की संज्ञा पाता है या शैतान की क्योंकि मानव का समाज के अभाव में कोई अस्तित्व नहीं है समाज में कई प्रकार के लोग होते हैं कुछ सदाचारी है कुछ दुराचारी है 

अतः हमें ऐसे लोगों का सांग करना चाहिए जो जीवन को उन्नति एवं निर्मल बनाएं अच्छी संगति का प्रभाव अच्छा तथा बुरे संगति का प्रभाव पूरा होता है

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