होनहार बिरवान के होत चिकने पात :-  बागवानी विज्ञान से संबंधित व्यक्ति यह जानते हैं कि वृक्ष प्रारंभ से ही पौधा रूप में हरा भरा चिकना लहराता हुआ होता है 


वही आगे चलकर श्रेष्ठ शक्ति संभल लहराता हुआ वृक्ष बंद करो मूल फलों से लग जाता है जो  सूखा रुखा  बदरंग पौधा होता है वह उतना श्रेष्ठ वृक्ष नहीं बन पाता यही स्थिति मानव जीवन पर लागू होती है 

जो बच्चा होना हार होता है उसके रंग ढंग बचपन में ही दिख जाते हैं वह अपनी बुद्धि विवेक शक्ति सामर्थ कार्य और व्यवहार के माध्यम से यह प्रकट कर लेता है कि उसका व्यक्तित्व प्रभावित श्रेष्ठ और प्रतिभा संपन्न होगा यही स्थिति है जब कहा जाता है कि होनहार बिरवान के होत चिकने पात

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