एक बार बादशाह अकबर सैर करने निकले थे वह एक गांव में पहुंचते हैं वहां के राजा उनका स्वागत करते हैं उन्हें खाने पर अच्छा अच्छा भोजन कराते हैं तब दोनों राजाओं में आपस में बात होती है कि हमारे इस राज्य में एक से बड़े एक कलाकार हैं जो आपकी तस्वीर बखूबी वैसी ही बना देंगे

अकबर बीरबल की कहानियां


तब बादशाह अकबर कहते हैं कि जो भी मेरी तस्वीर बिल्कुल जीवित तस्वीर की तरह बनाएगा मैं उसे 1000 स्वर्ण मुद्राएं दूंगा और यह बात गांव वालों को बता दी जाती है

सभी बादशाह अकबर की बढ़िया से बढ़िया तस्वीर बनाकर उनके सामने लाते हैं और बादशाह अकबर एक-एक कर उन तस्वीरों को देखते हैं और वह किसी में कुछ कमियां निकालते हैं तो किसी में कुछ कमियां बादशाह अकबर को अपना मनचाहा तस्वीर अभी तक नहीं मिल पाया

वह आगे बढ़ते जाते हैं और सबसे आखरी में एक व्यक्ति बचता है जिसका नाम महेश होता है ( जो कि बाद में यह बादशाह अकबर का खास आदमी बीरबल के नाम से जाना जाता है )

और बादशाह अकबर उनसे कहते हैं क्या तुम भी मेरी तस्वीर बना कर लाए हो तो महेश कहते हैं मैं आपकी तस्वीर नहीं बना कर लाया हूं मैं अपने साथ एक दर्पण लाया हूं जिसमें व अकबर को अपना चेहरा देखने को कहता है वहां आए सभी दरबारी कहते हैं कि इससे बढ़िया तस्वीर नहीं हो सकती

तो बादशाह अकबर सोचते है कि यह महेश तो बहुत ही दिमाग दार व्यक्ति है सभी ने मेरी तस्वीर बनाई पर मुझे पसंद नहीं आई यह व्यक्ति मुझे आइना दिखता है जो कि यह सभी लोगो को अच्छा लगता है महेश कहता है कि यह एक जीत जगत तस्वीर है जो कि इस तस्वीर से बढ़िया कोई भी तस्वीर नही बन सकते है

राजा इस बात से खुश हो जाते है तो वह महेश को 1000 स्वर्ण मुद्राएं दान में देते हैं इसके साथ-साथ वह अपनी एक अंगूठी भी देते हैं और कहते हैं कि वह हमारे राज्य पधारे , सभी लोग महेश की तारीफ करते है

Akber Birbal Ki Kahaniya 2

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