जादुई कुत्ते की कहानी

Rochak Kahaniya :गांव में सूरज नाम का एक आदमी रहता था उसका, गांव के चौक में छोटी सी दुकान थी वह दुकान में दिन भर मेहनत करता रहता पर फिर भी वह दो वक्त की रोटी ही खा पता था इसके अलावा वह कुछ भी नही खरीद सकता था

सूरज गरीब होते हुए भी वह दूसरों की मदद करने में पीछे नही हटता था जिस दिन भी उसकी अधिक आमदनी होती थी वह गांव के गरीब बच्चो और बूढ़ो को कुछ खाने के लिए दे देता था और खुश रहता था

एक बार की बात है कही से बाहर का कुत्ता गांव के अंदर आ जाता है वह भूखा था जिसके लिए वह अपने खाने की तलाश कर रहा था वह तलाश करते करते गांव के चौक में पहुच जाता है वहां वह सूरज की दुकान के पास वाले दुकान सोहन के दुकान में पहुचता है वहां भीड़ ज्यादा थी तो वह कुत्ता कुछ मिठाई खाने लगता है

जिसे देख सोहन नाराज हो जाता है और कुत्ते को डंडे से मार देता है वह कुत्ते को तब तक मरता है जब तक वह उठने की हालत में नहीं रहता कुत्ता जैसे तैसे करके  वहां से भाग निकलता है

वह भागते भागते  सूरज की दुकान के पास आकर बैठ जाता है अब उसकी हालत बहुत गंभीर हो गई थी सूरज की अचानक नजर उस कुत्ते पर पड़ती है और वह उस कुत्ते को कुछ खाने को देता है और वह देखता है कि वह कुत्ते को बहुत चोट आई है

तो वह अपना दुकान बंद करने के बाद उस कुत्ते को अपने साथ अपने घर ले जाता है घर में उस कुत्ते की देखभाल करता है उसके घाव में पट्टी लगाता है

दिन-ब-दिन उसकी हालत में सुधार आ जाता है वह अब सूरज का पालतू कुत्ता हो जाता है वह उसका नाम शेरू रखता है शेरू अपने मालिक से बहुत प्यार करता है और सूरज भी अपने कुत्ते से बहुत प्यार करता है

एक दिन सूरज के बेटे सोनू की स्कूल में फीस भरने की आखिरी तारीख थी वह हमेशा फीस लेट जमा किया करता था जिसके कारण उसके टीचर उससे बहुत नाराज हुआ करते थे

टीचर ने सोनू से कहा कि अगर तुम अपनी फीस कल नही लाओगे तो तुम्हे स्कूल से निकाल दिया जाएगा यह बात को वह घर आकर अपने पिताजी सूरज को बताता है

सूरज कहीं से भी पैसों की व्यवस्था करने में जुट जाता हैं पर उसे कहीं भी पैसा नहीं मिल पाता यह सब उसका पालतू कुत्ता शेरू सुनता रहता है

कही से भी पैसो की व्यवस्था नहीं होने पर वह घर में आकर अपनी पत्नी से कहता है कि पैसो की व्यवस्था नही हो पा रही है बात करते करते रात हो जाती है

सभी खाना खाते हैं और शेरू को भी खाना देते हैं शेरू जैसे ही अपना खाना खत्म करता है उसके प्लेट में एक सोने का सिक्का आ जाता है यह देख सूरज की आंखें देखती ही रह जाती है

सूरज यह सोचते रहते हैं कि यह सोने का सिक्का यहां कैसे आया तो फिर शेरू बोलता है यह सिक्का मैंने दिया है मैं एक जादुई कुत्ता हूं और आपके परिवार को बहुत दिनों से देख रहा हूं आपकी हालत कुछ ठीक नहीं है फिर भी मुझे आप ने पाला खाना दिया

उसके बदले में मैंने आपको यह उपहार दिया है आप इस सोने के सिक्के से अपने बेटे सोनू की स्कूल की फीस भेजिए और उसे अच्छा पढ़ा लिखा बनाइए

ऐसा अब रोज़ होता है सूरज जैसे ही शेरू को खाना देता है और शेरू जैसे ही अपना खाना खत्म करता है उसके प्लेट में एक सोने का सिक्का आ जाता है

जिसे सूरज उस सोने के सिक्के को को बेचकर कुछ पैसे ले आता है अब उसकी स्थिति दिन-ब-दिन सुधरती जाती है

सूरज अब अच्छे कपड़े पहनने लग जाता है उसकी दुकान भी थोड़ी बड़ी हो जाती है जिसमें वह नौकर भी रखता है देखरेख के लिए ,इसे देख उसके गांव के 2 व्यक्ति जो उसके घर पास रहते थे  सोच में पड़ जाते है कि सूरज तो हमसे भी गरीब था वह अब हमसे कैसे अमीर हो गया

कुछ तो गड़बड़ है पता लगाना पड़ेगा यह कह कर उस उस पर नजर रखते है वह दिन भर उसकी दुकान में नजर राखते है अब रात हो जाती है सोहन अपनी दुकान बन्द करके घर जाता है उसका पीछा रमेश और सुरेश करते रहते है उन लोग देखते है कि वह शेरू को खाना देता है वह खाना खत्म करते ही सोने का सिक्का देता है

वह चुप चाप शेरू को चोरी कर अपने घर ले आते है अब शेरू को खाने को देते है शेरू खाना भी खाता है पर वह सोने का सिक्का नही देता है उन लोग आपस मे बात करते है कि यह तो सोने का सिक्का नही दे रहा है

कुछ ही देर बाद शेरू कहता की तुम अपने  लालच से मुझे चोर करके लाये हो क्यो की तुम्हे सोना चाहिए यह कह कर शेरू सुरेश और रमेश को चिल्लाता है

और वह अपने मालिक के यहां वापस चले जाता है तो दोस्तो इससे पता चलता है कि लालच बुरी बाला है.

Rochak kahaniya ( Jadui Kutte Ki Kahani )
Akber Birbal Ki Kahaniya

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